Antarvasana-hindi-kahani

कहानी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मीरा रात के सन्नाटे में अपनी वासना को जीती है। रात — वह समय जब दुनिया सोती है, तब इंसान अपने असली रूप में जी सकता है। वह ब्रश उठाती है, कैनवस पर रंग भरती है, और उसके हाथ काँपते हैं — क्योंकि वह अपने अस्तित्व के सबसे गहरे हिस्से को छू रही होती है।

वह बिस्तर से उठी, चाय बनाने चली गई। चाय की केतली चढ़ी, तभी उसकी नज़र पुरानी डायरी पर पड़ी जो किताबों के बीच दबी थी। उसने डायरी खोली। पन्ने पीले पड़ चुके थे। एक जगह लिखा था: antarvasana-hindi-kahani

सवेरे के चार बजे थे। शहर अभी सो रहा था, लेकिन मीरा की आँखें खुल चुकी थीं। बगल में पति आलोक गहरी नींद में था। मीरा ने धीरे से करवट बदली और खिड़की से बाहर देखा। अंधेरा पिघल रहा था, जैसे कोई धीरे-धीरे परदा हटा रहा हो। कैनवस पर रंग भरती है

आलोक उठा, तैयार हुआ, ऑफिस चला गया। बच्चे स्कूल गए। मीरा ने खाना बनाया, कपड़े सुखाए, फर्श पोंछा। शाम को सब लौटे। खाना खाया। टीवी देखा। सब सो गए। antarvasana-hindi-kahani